विज्ञापन

गली के कुत्ते

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी गली के रसिक हैं, कुत्ते
        
                                                    
                            
गाते राग, दरबारी,

सुर होते, इतने सटीक,
नींद भाग जाती, हमारी।

कभी, कभी सुनाते हैं, विरह की ऐसी, गाथा,
विह्वल हो कर भावुक मन से, पकड़ लेते हैं, माथा।

हृदय अधीर हुआ जाता, जब करते वो, आवाज,
निद्रा रानी भागती उल्टे, छोड़ के अपना, काज!

डर के साये मे रात, गुजरती, जंहाई भी आँहे भरती,
सृजन, साहित्य सब हो जाए परती, कवि कल्पना भला कैसे निखरती!
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Amit Kumar

85 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8604 कविताएं

View Profile

Aparajit Nandi

17 कविताएं

View Profile

Prasoon Saxena

966 कविताएं

View Profile