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डर का असर

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो लोग दूसरों को डराते हैं,
        
                                                    
                            
वस्तुतः, वो अपनी कमी छिपाते हैं,

डर ये कि कहीं, कोई बोल न दें
कुत्सित कर्मों के राज खोल न दें।

डरा कर जो शेखी बघारता है,
पौरुष नहीं, ये कायरता है।

हर डर का एक अंतिम पड़ाव आता है,
जब इंसान का जमीर जाग जाता है।

डराने वाले का फिर मिट जाता है, नामोनिशान,
इतिहास भी करता है बार बार, उसका अपमान।
एक वर्ष पहले
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