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छुअन आंखों की

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी आंखों ने मुझे छुआ था,
        
                                                    
                            
स्पर्श की तरह ही, कुछ महसूस हुआ था,

उस छुअन की चुभन में मै बौरा गया था
जाने कितने ख्वाब सजा गया था,

उन्हीं आंखों में मेरा आशियाना था,
इस दुनिया से दूर, एक अलग ठिकाना था,

होश ओ हवाश जब आए मेरे,
तो देखा, हर जगह, धुआं धुआं था।

मै समझता था जिसे, नदी
वो एक गहरा कुआं था।
एक वर्ष पहले
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