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छुअन आंखों की

                
                                                         
                            उसकी आंखों ने मुझे छुआ था,
                                                                 
                            
स्पर्श की तरह ही, कुछ महसूस हुआ था,

उस छुअन की चुभन में मै बौरा गया था
जाने कितने ख्वाब सजा गया था,

उन्हीं आंखों में मेरा आशियाना था,
इस दुनिया से दूर, एक अलग ठिकाना था,

होश ओ हवाश जब आए मेरे,
तो देखा, हर जगह, धुआं धुआं था।

मै समझता था जिसे, नदी
वो एक गहरा कुआं था।
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एक वर्ष पहले

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