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अपनों का दगा

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब अपना कोई दगा देता है,
        
                                                    
                            
जिंदगी बोझ बन जाती है,
मौत के ख्वाब जगा देता है।

नजरों में खून उबलता है,
दिल जोर जोर चलता है,

धड़कनों में हरारत सी रहती है, हर पल,
एतबार के दीप बुझा देता है,

जब अपना कोई दगा देता है।

दिल पे छप जाती है, उमर के लिए,
कभी मिटती नही दगादरी की चोट,
लाख चाहे कोई मगर न भूले,
जिंदगी भर रह जाती है, एक कचोट,

खुद से उठ जाता है भरोसा, यारों,
तन्हा रहने का हुनर सिखा देता है,

जब अपना कोई दगा देता है।
2 वर्ष पहले
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