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ऐतबार

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दोस्ती निभाई तुमने इस तरह से यार,
        
                                                    
                            
मरहम लगे है अब तो, दुश्मनों के वार,

गुरबत की जिंदगी में, खुशियां थी बस दो चार,
तूने वो भी छीन ली है, हम हो गए बेजार,

गर एक बार तोड़ते दिल, कोई गिला न था,
शीशे की मानिंद चकनाचूर, किया है बार बार,

खंजर जो भौंका तुमने, हुआ जिगर के पार,
बस टीस इतनी सी है दोस्त, वफा गई है हार,

रिश्तों को तुमने यार मेरे, किया है दागदार,
अब कोई ना करेगा, अपनो पे ऐतबार।
2 वर्ष पहले
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Rabindra Aman

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