दोस्ती निभाई तुमने इस तरह से यार,
मरहम लगे है अब तो, दुश्मनों के वार,
गुरबत की जिंदगी में, खुशियां थी बस दो चार,
तूने वो भी छीन ली है, हम हो गए बेजार,
गर एक बार तोड़ते दिल, कोई गिला न था,
शीशे की मानिंद चकनाचूर, किया है बार बार,
खंजर जो भौंका तुमने, हुआ जिगर के पार,
बस टीस इतनी सी है दोस्त, वफा गई है हार,
रिश्तों को तुमने यार मेरे, किया है दागदार,
अब कोई ना करेगा, अपनो पे ऐतबार।
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