विज्ञापन

मुस्किलों को शर्मिंदा:......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुश्किलें हो जाएं शर्मिंदा
        
                                                    
                            
ऐसे मुश्किलों को शर्मिंदा करना
भले परिस्थितियां विपरीत हो
समय साथ ना दे
परंतु,हौसलों को जिंदा रखना
एक टूटे हौसलों के साथ
फिर दूसरा सपना देखना
जब तक इस धरा पर
सांसे चले
हार का लिबास न पहनना
रुकना समस्या का समाधान नहीं
खुद को प्रोत्साहन देना
मंजिल मिलेंगी क्यों नहीं
मंजिल को भी एक बार
खुद का पता देना
मुश्किल हो जाए शर्मिंदा
ऐसे मुश्किलों को शर्मिंदा करना
-ममता तिवारी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Amit Kumar

85 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8604 कविताएं

View Profile

Aparajit Nandi

17 कविताएं

View Profile