विज्ञापन

किस धर्म की बात करते हो: ...…

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इंसान को इंसान समझते नहीं
        
                                                    
                            
पशु पंछी पेड़ पौधों में जान देखते नहीं
इंसानियत की बात जहां हो पीछे मुड़ जाते हो
निर्मम निष्ठुर की तरह जीते हो
किस धर्म की बात करते हो

किसी को दर्द देकर मुस्कुराना
सबको नीचा दिखाना
जीते जी इंसान को मार देना
तुम्हारे लिए आम बात है
तुम शान से कैसे चल पाते हो

गरीब लाचार तुमसे डर डर कर जीते है
मंदिरों में जाकर माथा टेक देते हो
राह चलते इंसान को कुचल देते हो
ये सब कुछ तुम्हारे लिए सम्मान की बात है
कौन तुम अपने अच्छाई की मिसाल देते हो
गर्व से, ऊंचा सर करके चलते हो
किस धर्म की बात करते हो।।
-ममता तिवारी
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rabindra Aman

118 कविताएं

View Profile