इंसान को इंसान समझते नहीं
पशु पंछी पेड़ पौधों में जान देखते नहीं
इंसानियत की बात जहां हो पीछे मुड़ जाते हो
निर्मम निष्ठुर की तरह जीते हो
किस धर्म की बात करते हो
किसी को दर्द देकर मुस्कुराना
सबको नीचा दिखाना
जीते जी इंसान को मार देना
तुम्हारे लिए आम बात है
तुम शान से कैसे चल पाते हो
गरीब लाचार तुमसे डर डर कर जीते है
मंदिरों में जाकर माथा टेक देते हो
राह चलते इंसान को कुचल देते हो
ये सब कुछ तुम्हारे लिए सम्मान की बात है
कौन तुम अपने अच्छाई की मिसाल देते हो
गर्व से, ऊंचा सर करके चलते हो
किस धर्म की बात करते हो।।
-ममता तिवारी
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