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आबाद हैं:.....

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गैरों के दिए दर्द सितम
        
                                                    
                            
हम कहाँ याद रखते हैं।
हम तो अपनों के दिए,
ज़ख्मों से ही आबाद हैं।।
-ममता तिवारी
4 घंटे पहले
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