विज्ञापन

स्मृतियाँ

Mahesh Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे प्रिये,
        
                                                    
                            
तुम्हारा पत्र मिला
संतोष हुआ – तुम स्वस्थ हो !

तुमने पूछा है
मुझे तुम्हारी याद नहीं आती ?
मिलने की आरज़ू नहीं होती ?
पहले तुम तड़पती थी
व्याकुल रहती थी
दौड़ी चली आती थी
मुझसे मिलने को
पार कर सभी बाधाएं।

मैं तुम्हारी प्राथमिकता था
प्रथम प्राथमिकता !

प्रिये !
व्याकुलता अब नहीं रहती।
प्राथमिकता
तुम अब भी हो।

फ़र्क़ इतना है
तब मैं स्मृतियाँ कमा रही थी
जमा कर रही थी।

अब
उनमें अभिवृद्धि हो गई है।
उन्हीं स्मृतियों में
खोयी रहती हूँ।


जब तंद्रा टूटती है
डायरी के पन्ने पलटती हूँ
कुछ स्मृतियाँ निकाल लेती हूँ

ए०टी०एम० से राशि जैसे।

मुझे कोई कमी नहीं
कोई अभाव नहीं
स्मृतियों का ख़ज़ाना
मेरे पास है
तुम्हारी साँसों से भीगी
मेरी हर साँस है।

मेरा दिल तुम्हारे पास है
- अंजुम लखनवी
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile