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भारत माता के चरणों में बारंबार प्रणाम दो

मंगला तोमर

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भारत माता के चरणों में बारंबार प्रणाम दो
        
                                                    
                            
इन पर अपना तन-मन-धन सब वार दो

अनुपम रूप है भारत माँ का
शुभ्र हिमालय मुकुट शीश का
जम्मू कश्मीर इसके दो नयन
दिल्ली दिल है मन वृंदावन
अरुणाचल है माँ का आनन
करता जलधि चरण प्रक्षालन
तहज़ीबें हैं गंगा - जमुनी
हिंदी है मस्तक की बिंदी

माँ के गौरव और वैभव पर तुम प्राणों को वार दो
अगले सौ जन्मों को भी न्यौछार दो

देश में हैं कुछ ऐसे वंचक
महा स्वार्थी समाज कंटक
खाते हैं वो जिस थाली में
करते हैं फिर छेद उसी में
बोलें कटुक वचन विद्रोही
देश में रहकर देश के द्रोही
करते हैं भारत की निंदा
फिर भी क्यों है अबतक जिंदा

उनको तो जीवित समाधि तत्काल दो
कृतघ्नों को ऐसा दण्ड प्रहार दो
भारत माता के चरणों 
- म॔गला तोमर
(लाडनूं)राजस्थान
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