मेरे ख़्वाब तुम्हारे पास गिरवी हैं
क़ीमत मैं किस्तों में चुका रहा हूं
तुम इतना याद आ रहे हो ,
की मैं ख़ुद को भूल जा रहा हूं
कभी मिलना मुझे तो मुझसे मिलवा देना
मैं खुद को बहुत याद आ रहा हूं।
- आलोक सिंह