विज्ञापन

पूरा करना है क्योंकि एक न एक दिन

Kumari Priyanka

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुनगुनाती रही नदिया
        
                                                    
                            
निकल पहाड़ों से।
लरजति ,लहरती,
इठलाती,इतराती,
मैदानों तक।
कभी रुद्र,तो कभी चंचल,
कभी शांत,कभी हलचल,
हर परिवेश में खुद को ढालती
बहती रही अनवरत
बिना थके ,बिना रुके।
बस,रौ में अपने एक गीत गाते हुए,
गुनगुनाते हुए।
खुद को ही समझते और समझाते हुए।
कि प्यार सिर्फ समुद्र से मिलन नहीं।
ये तो जीवन का सफ़र है।
गुनगुनाते,मुस्कुराते, हंसते, हँसाते
पूरा करना है क्योंकि एक न एक दिन
सबको मिटना है।
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

Priya Mehra

1 कविता

View Profile