नम आवाज
याद है, जब भी मैं कहता था,
सुनो - तुमनें कुछ कहा क्या,
तुम कहती थी - नहीं तो,
तो मैं कहता था - तो कहो न,
तुम्हारी मीठी मधुर आवाज सुनने को कान तरस गए हैं,
अब जब भी अकेला होता हूँ,
तुमसे बातें करता हूँ,
और कोशिश करता हूँ,
खामोशी से,
तुम्हारी आवाज़ सुनने की,
अचानक कहीं दूर से आती हुई,
मधुर सी, मीठी सी,
नम सी एक आवाज़,
कानो से मद्धिम सी टकराती है,
ये तुम्हारी ही आवाज़ होती है,
जाते जाते भी तुम्हारे मुख से,
ऐसी ही मद्धिम सी आवाज निकली थी,
मुझे बचा लो, मुझे बचा लो,
मैं बदहवास इधर उधर कोशिश करता हूँ,
मगर प्रकृति के क्रूर हाथों ने,
हमें सदा के वास्ते,
जुदा कर दिया.
- कुल भूषण
10.04.21