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कल्पना की उड़ान

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल्पना की उड़ान
        
                                                    
                            
खुदा ने अर्जी कबूल की,
मेरे मन को लगा दिए सुंदर पंख,
मैं भी उड़ान भरूंगी आज,
इन उड़ते परिंदों के संग,
देखूंगी आसमान में परिंदों का ठिकाना,
क्यों रोज लौट आते हैं धरा पर,
क्या ऊपर नहीं है उनका कोई आशियाना,
हर तरफ इंसान मायूस दिखता है,
उतरे उतरे चेहरे हैं,
कोई भी खुश यहां नहीं दिखता है,
खुशियां शायद ऊपर हो कहीं,
मैं उनको लाना चाहती हूं,
शुक्र खुदा का मुझे पंख लगा दिए,
अब मैं भी उड़ना चाहती हूं,
हर मायूस चेहरे पर,
मैं खुशियां लाना चाहती हूं.
-कुल भूषण 
3 वर्ष पहले
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