कल्पना की उड़ान
खुदा ने अर्जी कबूल की,
मेरे मन को लगा दिए सुंदर पंख,
मैं भी उड़ान भरूंगी आज,
इन उड़ते परिंदों के संग,
देखूंगी आसमान में परिंदों का ठिकाना,
क्यों रोज लौट आते हैं धरा पर,
क्या ऊपर नहीं है उनका कोई आशियाना,
हर तरफ इंसान मायूस दिखता है,
उतरे उतरे चेहरे हैं,
कोई भी खुश यहां नहीं दिखता है,
खुशियां शायद ऊपर हो कहीं,
मैं उनको लाना चाहती हूं,
शुक्र खुदा का मुझे पंख लगा दिए,
अब मैं भी उड़ना चाहती हूं,
हर मायूस चेहरे पर,
मैं खुशियां लाना चाहती हूं.
-कुल भूषण
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