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एक नई सुबह

krishna yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन ऑखो के झरोखो मे एक कोयल कूक रही थी।
        
                                                    
                            
हम खोये थे तेरे सपनों में वो कह रही थी सुबह हुई।।
फिर चला सर्द हवा का झोंका छूने लगा मेरे दिल को।
जैसे तुम छू लेती थी अपने हाथों से क़भी कभी ।।
फिर दौड़ती हुई गिलहरी रुकी देखने लगी अचरज से मुझको।
जैसे देखा करती थी रुक रुक कर पहले मुझको ।।
फिर गिरे डाल से दो पत्ते एक फुल के साथ मे ।
लग रहा था गिर चुके हम हल्के हल्के तेरे प्यार में ।।
फिर चिड़िया चहकी गा रही थी मिट्ठा मीठा मधुर गान ।
जैसे बज रही हो तेरी परों की पायल ओर चूड़ियों की खन खन ।।
फिर ओश की बूंदो की मेरे चेहरे पे बौछार हुई ।
एक नई सुबह और तेरी याद में इस दिन की शुरूवात हुई

केके यादव

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8 वर्ष पहले
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