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फ़िक्र है मुझे आजकल दोस्ती क्या है हम जानकर

kishan kharadi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फ़िक्र है मुझे आजकल दोस्ती क्या है हम जानकर
        
                                                    
                            
क्यों फरेब चल रहा है दोस्ती के नाम पर

सबसे ख़ूबसूरत जो कभी दोस्ती का रिश्ता था
बड़ी तकलीफ़ होती है आजकल वही रिश्ता दाग़दार जानकर

यकीन नहीं होता दोस्त "दोस्त" का क़ातिल निकले
रूह कांप जाती है हक़ीक़त जानकर

दोस्ती में लोग जान दे देते थे आज लेने की नौबत क्यों आई, क्या हो गया है इस दुनिया ए गुलशन ए बाज़ार में

क्यों दुनिया में बेरहम हर शख़्स बन गया
तकलीफ़ होती है शरीफों की गिनती कम जानकर

आंख बंद करके किसी पर भरोसा करना ठीक नहीं 'किशन' तुम खुद को बचाए रखना इस दौर के खूनी खेल से
2 घंटे पहले
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