फ़िक्र है मुझे आजकल दोस्ती क्या है हम जानकर
क्यों फरेब चल रहा है दोस्ती के नाम पर
सबसे ख़ूबसूरत जो कभी दोस्ती का रिश्ता था
बड़ी तकलीफ़ होती है आजकल वही रिश्ता दाग़दार जानकर
यकीन नहीं होता दोस्त "दोस्त" का क़ातिल निकले
रूह कांप जाती है हक़ीक़त जानकर
दोस्ती में लोग जान दे देते थे आज लेने की नौबत क्यों आई, क्या हो गया है इस दुनिया ए गुलशन ए बाज़ार में
क्यों दुनिया में बेरहम हर शख़्स बन गया
तकलीफ़ होती है शरीफों की गिनती कम जानकर
आंख बंद करके किसी पर भरोसा करना ठीक नहीं 'किशन' तुम खुद को बचाए रखना इस दौर के खूनी खेल से