ग़ज़ल
नफरतें दिल से मिटाऊंगा, चला जाऊंगा।
मैं प्यार के गीत सुनाऊँगा ,चला जाऊँगा।
तेरी गलियों में अँधेरा है बहुत जाने ग़ज़ल
मैं दिया दिल का जलाऊंगा,चला जाऊंगा।
जा बजा काटें बिछाते हैं यह दुनिया वाले,
राह में फूल बिछाऊंगा , चला जाऊंगा।
अपनी सरहद की निगाहबानी भी करनी है मुझे,
मैं तेरी मांग सजाऊंगा , चला जाऊंगा ।
शहर का शहर है फूलों का यहां शैदाई
दिल के मैं ज़ख्म दिखाऊंगा , चला जाऊंगा।
- खुर्शीद भारती , मिर्जापुर
उत्तर प्रदेश