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सपनों की ज़रूरत

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब कुछ मिल जाए यूँ ही तो,
        
                                                    
                            
फिर कौन सा सपना होगा?
न पाने की कोई चाहत होगी,
न इन्हें पूरा करने की जद्दोजहद।

सपनों को पाने की खातिर,
जब मन हर पल चलता है,
ठोकर खाकर, गिरकर भी
फिर उठकर आगे बढ़ता है।

इन्हें पूरा करने का जतन
जीवन को अर्थ सिखाता है;
हर छोटी-छोटी कोशिश में
एक नया विश्वास जगाता है।

इन सपनों का सिलसिला
कभी थमना नहीं चाहिए;
कुछ पाने की चाहत दिल में
हमेशा जिंदा रहनी चाहिए।
— कमल किशोर झा 
6 घंटे पहले
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