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सपनों की ज़रूरत

                
                                                         
                            सब कुछ मिल जाए यूँ ही तो,
                                                                 
                            
फिर कौन सा सपना होगा?
न पाने की कोई चाहत होगी,
न इन्हें पूरा करने की जद्दोजहद।

सपनों को पाने की खातिर,
जब मन हर पल चलता है,
ठोकर खाकर, गिरकर भी
फिर उठकर आगे बढ़ता है।

इन्हें पूरा करने का जतन
जीवन को अर्थ सिखाता है;
हर छोटी-छोटी कोशिश में
एक नया विश्वास जगाता है।

इन सपनों का सिलसिला
कभी थमना नहीं चाहिए;
कुछ पाने की चाहत दिल में
हमेशा जिंदा रहनी चाहिए।
— कमल किशोर झा 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

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