जयचन्दों की फौज बड़ी है
पद्मावती बदहवास खड़ी है।
गद्दारी की महफिल सजी है
राजाओं की त्यौरी चढ़ी है।
खामोश सीता अश्क़ों से भरी
नैनों में रावण की फौज पड़ी है।
न राम होगा न कृष्ण आयेंगे
जब रावण औ'कंस की चली है।
बिन छीने न्याय न मिलेगा कभी
सब ठौर अन्याय की लौ जली है।
- जीवन समीर
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