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सत्य सनातन है

Jagdish Prasad

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                            "सत्य सनातन है"
        
                                                    
                            

सत्य का न जन्म है, न विस्तार है,
न अन्त उसका, वह तो अजन्मा सार है।
सत्य सनातन है, सदा से वही है,
असत्य का जन्म, क्षय और अन्त सही है।

पाप करो तुम, धोए गंगा,
किसे छल रहे हो, खुद को या गंगा?
गंगा तो पावन, मन तो मैला,
पहले मन धो, फिर तन धुला।

जीवन का मतलब, अमीर होना नहीं,
लोकप्रिय, परफेक्ट की, भीड़ होना नहीं।
वास्तविक बनो, विनम्र बनो,
दयालु बनो, तो जीवन धन्य बनो।

कमाल देखो, कैसी रीत है,
आजाद रिश्तों में, बंधन की जीत है।
और बंधे रिश्तों में, आजादी ढूंढते,
बंधना-छूटना, दोनों में झूझते।

जरूरत पर बहाना, बुरे वक्त पर ताना,
अपनों का ही अक्सर, होता है निशाना।
इसलिए उम्मीद, अपनों से कम रखो,
अपने कर्म पर ही, भरोसा रखो।

हर इंसान अलग, अपनी पहचान है,
तुलना न करो, यही तो ज्ञान है।
किसी और जैसा, बनने में मत खो जाओ,
खुद जैसे हो, वैसे ही हो जाओ।

कोई जलता है, तो सफलता भी यही,
तुममें कुछ बात है, तभी तो जलन रही।
अब समझदार हैं, बात समझ जाते हैं,
प्यार से बोले तो, काम समझ जाते हैं।

आधी खूबसूरती, वाणी में बसती,
आधी खूबसूरती, मौन में सजती।
मधुर स्वभाव ही, जीवन विटामिन है,
इसी से तो, हर दिन रंगीन है।

रात के बाद ही, सवेरा आता,
बुरे वक्त के बाद, अच्छा वक्त लाता।
उम्मीद कभी भी, छोड़ना मत,
अंधेरे के बाद ही, उजाला सत।

सफल होना है तो, सुनो ये बात,
जो सलाह देते हो, दूसरों को दिन-रात।
उसी पर खुद भी, अमल करो,
तभी ये जीवन, सफल करो।

 
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