"हम दोनों से ही पूरा है ये जहान"
समानता का अर्थ, एक जैसा होना नहीं,
पूरक बनना है, खुद को खोना नहीं।
सोचो अगर एक से ही, काम चल जाता,
तो ईश्वर दो रूप, क्यों बनाता?
रंग अलग दिए, रूप अलग दिए,
गुण अलग दिए, स्वरूप अलग दिए।
भेद नहीं इसमें, ये तो विधान है,
दोनों से ही पूरा, ये जहान है।
बराबरी का अर्थ, ये नहीं होता,
नारी नर जैसी, नर नारी होता।
बराबरी हो हक में, मान में हो,
अवसर में हो, सम्मान में हो।
प्रकृति में थोड़ा, अंतर तो रहेगा,
तभी तो जीवन, सुंदर लगेगा।
एक में है शक्ति, जो राह दिखाती,
एक में है ममता, जो राह सजाती।
एक में है साहस, आगे बढ़ने का,
एक में है धीरज, सबको गढ़ने का।
पर देखो तो दोनों, दोनों में बसते,
कभी नर में ममता, कभी नारी में साहस हँसते।
एक है किनारा, एक है धारा,
दोनों मिलें तो, बनती है नदिया प्यारा।
धूप और छाँव, दोनों जरूरी,
एक के बिना, दुनिया है अधूरी।
समर्पण कभी भी, गुलामी नहीं है,
ये तो प्रेम की, सबसे बड़ी निशानी है।
नदी समर्पित, सागर को होती,
क्या छोटी होती? नहीं, बड़ी होती।
नदी ही तो, सागर को सागर बनाती,
बूंद ही तो, बादल को गागर बनाती।
इसलिए सुनो, लड़ना नहीं है,
बराबरी के नाम पर, बिखरना नहीं है।
तुम भी किनारा, मैं भी किनारा,
हम दोनों मिलकर, बनें एक धारा।
हम एक-दूजे के, पूरक बन जाएँ,
तो जीवन का, हर अर्थ सज जाए।
-- जगदीश प्रसाद शर्मा