विज्ञापन

आप दावा करें और हम दलीलें भी नहीं रखें।

Iqbal mehdi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमसे कहते हैं कि, हम दिमाग़ अपना सही रखें।
        
                                                    
                            
आप रिश्ता बदल दें और हम लहज़ा वहीं रखें ।।

हमें खामोश रहने की नसीहत आप न कीजिए।
आप दावे करें और हम दलीलें भी नहीं रखें।।

बिना सोचें हुए ही फैसला ये कर दिया तुमने ।
ये सारे दर्द और तन्हाइयां सब कुछ हमीं रखें।।

हमें इस दिल का क्या करना है न हमको बताइए।
तुमने ठुकरा दिया तो हम इसे चाहे कहीं रखें।।

ज़माने में हजारों ही ख़ुदाओं का बसेरा है।
ये तो मर्ज़ी हमारी है कहां अपनी जबीं रखें।।

हमारे सर पर जब "मेंहदी"लगे इल्ज़ाम इतने हैं।
लिखित तहरीर देने में भला हम क्यूं कमी रखें।।
-इक़बाल मेंहदी काजमी
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all