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शृंगार लिखूंगी मैं

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी परिधि को ही , अपना संसार लिखूंगी मैं ।
        
                                                    
                            
हर मौसम को बहार लिखूंगी मैं,
फिर उस पर अपना अधिकार लिखूंगी मैं ।।
अभी यही है , जो मैनें लिखा ।
प्रेम मिले , फिर शृंगार लिखूंगी मैं। ।
3 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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