उसकी परिधि को ही , अपना संसार लिखूंगी मैं ।
हर मौसम को बहार लिखूंगी मैं,
फिर उस पर अपना अधिकार लिखूंगी मैं ।।
अभी यही है , जो मैनें लिखा ।
प्रेम मिले , फिर शृंगार लिखूंगी मैं। ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X