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देखन चाहत हौ बदलाव मुला निज अंतर सोचत नाहीं।

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखन चाहत हौ बदलाव मुला निज अंतर सोचत नाहीं।
        
                                                    
                            
भीतर से शुरुआत हुवै तब ही जग में वहु आय दिखाहीं।
लोग यहै बस चाहि रहे सब लोग करैं निज जीवन माहीं।
पै यह जानि लियौ ढँग ते निज का बदलौ खुद ही हुइ जाहीं।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
5 घंटे पहले
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