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हम हैं तो गम किस बातका

HORI LAL

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कह क्या लोग रहे हैं हमको सुनना ये पसंद ना हमको,
        
                                                    
                            
केवल अब तुमको सुनता हूं सच में इसमें भला हमारा,
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा,
हर दुख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।

हमें अकेले डर लगता है चला करो तुम साथ हमारे,
साथ हमारे चलोगे जब तुम मंजिल पर जल्दी पहुंचेंगे।
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा,
हर दुःख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।

अगर कहीं पर अधिक देर तक रुकने का मन करे हमारा,
अधिक देर तक नहीं वहां हमें रुकने न दें काम तुम्हारा।
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा,
हर दुख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।

मेरे चंचल मन को अब तुम,अपने ही अनुसार चलाओ,
यार हमारे चंचल मन को पड़े जरूर तो फटकारों।
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा,
हर दुख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।

लोगों की पीड़ा लिखने का मन करता है बहुत हमारा
जब भी मैं लिखने बैठू तो करिएगा सहयोग हमारा
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा
हर दुख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।

कोई हमारे इस जीवन में कहीं देखना जहर न घोले
बहुत संभाल के रहना होगा सब अपने हैं नहीं हमारे
हम हैं तो गम किस बात का,हाथ पकड़ कर चलो हमारा
हर दुख से हम लड़ेंगे डटकर,पंख नहीं कमजोर हमारे।।
- होरीलाल"विनीता"
4 घंटे पहले
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