डर ये न था कि मैं हार जाऊंगा ,
डर था कि वो मुझे जीतने से रोकेंगे,
हर लम्हा, हर राह पर टोकेंगे,
वो मुझे एक नज़र भर विलग खुदसे न छोड़ेंगे,
वो बेहद होकर मेरी राह की हद तय कर देंगे,
मैं गलियों से होकर फिर राह पर लौट आऊंगा,
वो जाने कैसे मेरी ज़िद को रोकेंगे।