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रोको मेरी ज़िद

Himanshu Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डर ये न था कि मैं हार जाऊंगा ,
        
                                                    
                            
डर था कि वो मुझे जीतने से रोकेंगे,
हर लम्हा, हर राह पर टोकेंगे,
वो मुझे एक नज़र भर विलग खुदसे न छोड़ेंगे,
वो बेहद होकर मेरी राह की हद तय कर देंगे,
मैं गलियों से होकर फिर राह पर लौट आऊंगा,
वो जाने कैसे मेरी ज़िद को रोकेंगे।
8 महीने पहले
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