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नींद से अब अदावत क्या?

Himanshu kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुमसे अब बग़ावत क्या,
        
                                                    
                            
इश्क़ की अब शिकायत क्या?

उम्र गुज़री, अरसा बीता,
चेहरे की अब सजावट क्या?

तन्हा-तन्हा रातें बीतीं,
दिन की अब शिकायत क्या?

ख़्वाबों के भी खर्चे छूटे,
नींद से अब अदावत क्या?

वक़्त बिता, मंज़िल छूटी,
क़िस्मत से फिर शिकायत क्या?

प्यार के क़िस्से सब तुम्हारे हिस्से,
'आनंद' को इश्क़ से अब इनायत क्या!
~हिमांशु भारद्वाज 'आनंद '
17 घंटे पहले
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