अक्सर बातेंअधूरी रह जाती है,
लेकिन अधूरी बात भी कुछ कह जाती है।
अधूरा प्रेम, अधूरी पूजा, अधूरी इच्छा,
अधूरी होकर भी सिखा जाती है
पूरे होने का वो महत्व, जो कभी
पूरा होना नहीं सिखा सकता।
अधूरेपन में निहित होती है एक आशा
जो पूर्णता में कभी नहीं हो सकती।
एक उम्मीद जिसके बल पे व्यक्ति
पूरेपन के अनुभव तक पहुंचता है,
और भूल जाता है अधूरा होना।