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गम बेटे के जाने का

Govind karn

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब ढलने लगी जीवन की डोर, तो मेरा जग सारा छिन लिया।
        
                                                    
                            
गोद सुनी, अधूरा जीवन आँखों का तारा छिन लिया।
सिखाया जिसे उँगली पकड़ चलना मैने, हाथ से वो फिसल गया।
छोटा था वो घर में सबसे, पर जीवन में आगे निकल गया।
घर का कोना कोना हँसी से गूँजता था,अब वही डर लगता है।
दीवारें भी याद दिलाते हैं बीते पल की, जीवन अब वीराना सफर लगता है।
3 घंटे पहले
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