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कश्मकश

Garima Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उर में मेरे आज एक आग लग रही है,
        
                                                    
                            
आँखों में सपनों को लपट-दाग़ लग रही है,
बेख़ौफ़ ये परिंदा, बेसुराग फिर रहा है,
बेख़ौफ़ ये परिंदा, बेसुराग फिर रहा है,

होंठ बोल रहे मोहब्बत नाम,
कलम आज़ाद लिख रही है।
एक घंटा पहले
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