उर में मेरे आज एक आग लग रही है,
आँखों में सपनों को लपट-दाग़ लग रही है,
बेख़ौफ़ ये परिंदा, बेसुराग फिर रहा है,
बेख़ौफ़ ये परिंदा, बेसुराग फिर रहा है,
होंठ बोल रहे मोहब्बत नाम,
कलम आज़ाद लिख रही है।
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