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भीख मांगते भिखारी बनकर

Gajendra charan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसने अपने हृदय की आग से
        
                                                    
                            
चूल्हा जलाया,
खाना पकाया और खिलाया,

अपने अंतर्मन की जलन से,
अपने ही ख्वाब जला डाले,
और औलाद को पाला,

रोटी सेकते
अपने पोर भी सेक डाले,
आंखों में भविष्य की चिंता का
धुंआ बसाया,
और फिर भी घर बसाया,

एक घर छोड़ा
दूसरा बसाने को,
लोगों ने उसे छुड़वाया
उसे जलाने को,

पवित्रता का ठेका थमाया गया,
कमबख्त इसका भी
फायदा उठाया गया,
जला दी गई जिंदा पवित्रता,
लक्ष्मी का जनाजा उठाया गया,

स्त्रियों ने
गालियां भी ली अपने पर,
कोई नहीं कहता
तेरा बाप तेरा भाई,

स्त्रियों ने तब भी रखा
अपने सुहाग को सिर पर,
गले में, हाथों पर,
हां पूरे शरीर पर,

देखता हूं एक मां को
भीख मांगते भिखारी बनकर,
सोचता हूं क्या कमाया
एक मर्द बनकर।
एक घंटा पहले
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विजय कुमार

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