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मंदिर हो या मस्जिद यह आस्था के केंद्र हैं

Furkan Rahi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुद को खुदा समझते हैं नेता ही हर घड़ी
        
                                                    
                            
खिलवाड़ आस्था से करते हैं हर घड़ी

मंदिर हो या मस्जिद यह आस्था के केंद्र हैं
मजहब के नाम पर घर जलते हैं हर घड़ी
 
एक घंटा पहले
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