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ग़ज़ल

Dushyant Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग़ज़ल :-
        
                                                    
                            

मत पूछो हाल दिसम्बर का ।
सूखा सा गाल दिसम्बर का ।।

मफलर स्वेटर शाल रजाई. .
ये सब है माल दिसम्बर का ।।

सर्द हवाएँ ठन्डे झोके ..
फैला है जाल दिसम्बर का ।।

बर्फ जमी है घाटी में अब. ..
चाँदी सा बाल दिसम्बर का ।।

आधी गुजरी - आधी बाकी. .
मुझ जैसा हाल दिसम्बर का ।।

दुष्यंत यादव
भिलाई


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6 वर्ष पहले
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