ग़ज़ल :-
मत पूछो हाल दिसम्बर का ।
सूखा सा गाल दिसम्बर का ।।
मफलर स्वेटर शाल रजाई. .
ये सब है माल दिसम्बर का ।।
सर्द हवाएँ ठन्डे झोके ..
फैला है जाल दिसम्बर का ।।
बर्फ जमी है घाटी में अब. ..
चाँदी सा बाल दिसम्बर का ।।
आधी गुजरी - आधी बाकी. .
मुझ जैसा हाल दिसम्बर का ।।
दुष्यंत यादव
भिलाई
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