देख ! खोल ! आँखें अपनी,
सीना तान खड़ा हूँ !
गर, दहाड़ना, तुझे आता है,
तो भागना, मुझे भी नहीं भाता ।
ऐ किस्मत !
लगा ले तू भी, जोर अपना,
गर, लडऩा तुझे आता है,
तो हारना, मुझे भी नहीं आता ।
लगा ले तू भी, जोर अपना ।
-डी के तिवारी