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सब का मान थी वो

DrManju Saini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब का मान थी
        
                                                    
                            
वो नारी नायाब थी
बोलने में कमाल थी
बात रखने में कमाल थी
सभी उनको सराहते थे
वो अपना पक्ष अच्छे से रखती थी
संस्कृत हिंदी पर पूर्ण घ्यान रखती थी
माँ दुर्गा की मूरत थी
गरिमामय छवि थी
सब के दिलों पर राज वो करती थी
दुश्मन को लोहा मनवा देती थी
अछे वयक्तित्व की धनी थी
सब पर स्वराज करती थी
ये हमारी सुषमा स्वराज थी

- डॉ मंजू सैनी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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