सब का मान थी
वो नारी नायाब थी
बोलने में कमाल थी
बात रखने में कमाल थी
सभी उनको सराहते थे
वो अपना पक्ष अच्छे से रखती थी
संस्कृत हिंदी पर पूर्ण घ्यान रखती थी
माँ दुर्गा की मूरत थी
गरिमामय छवि थी
सब के दिलों पर राज वो करती थी
दुश्मन को लोहा मनवा देती थी
अछे वयक्तित्व की धनी थी
सब पर स्वराज करती थी
ये हमारी सुषमा स्वराज थी
- डॉ मंजू सैनी
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