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कुछ कहने दो

DR ANITA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज दर्द को कुछ कहने दो
        
                                                    
                            
अश्कों को बहने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो
वर्षो से यादों की जंजीरो
में जकड़े परिंदो को
उन्मुक्त गगन में उड़ने दो।
अश्कों को बहने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो।
उड़ने दो अपनी मुहब्बत
की खुशबू को फ़ज़ाओं में
आज़ाद कर दो हर उन लम्हों
को सदियों से जो ठहरी हैं
लबों की हर दुआओं में
कहने दो आज बस कहने दो
मेरी मुहब्बत को एक खूबसूरत
एहसास बनाकर पानी सा उसे बहने दो
मत रोको समय को किसी और के पास
से गुजरने दो , बस गुजरने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो ।
-अनिता गोस्वामी
3 घंटे पहले
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