आज दर्द को कुछ कहने दो
अश्कों को बहने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो
वर्षो से यादों की जंजीरो
में जकड़े परिंदो को
उन्मुक्त गगन में उड़ने दो।
अश्कों को बहने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो।
उड़ने दो अपनी मुहब्बत
की खुशबू को फ़ज़ाओं में
आज़ाद कर दो हर उन लम्हों
को सदियों से जो ठहरी हैं
लबों की हर दुआओं में
कहने दो आज बस कहने दो
मेरी मुहब्बत को एक खूबसूरत
एहसास बनाकर पानी सा उसे बहने दो
मत रोको समय को किसी और के पास
से गुजरने दो , बस गुजरने दो
आज दर्द को कुछ कहने दो ।
-अनिता गोस्वामी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X