विज्ञापन

शायद जिंदगी के कुछ

DR ANITA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं हवा हूँ
        
                                                    
                            
शायद मैं लापता हूँ
खुद से जुदा हूँ
मैं हवा हूँ
मैं फूलों में हूँ
मैं पत्तों में हूँ
और शाख़ों में हूँ
शायद इंसानो से
जुदा हूँ
मैं हवा हूँ
शायद मैं लापता हूँ।
मैं नफ़रत हूँ
और मुह्हबत भी हूँ
आंसू भी मैं
और मुस्कुराहट भी
मैं
शायद जिंदगी के कुछ
पन्नो पर गुमशुदा हूँ
मैं हवा हूँ
शायद मैं लापता हूँ।
-अनिता गोस्वामी
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

विजय कुमार

171 कविताएं

View Profile