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शायद जिंदगी के कुछ

                
                                                         
                            मैं हवा हूँ
                                                                 
                            
शायद मैं लापता हूँ
खुद से जुदा हूँ
मैं हवा हूँ
मैं फूलों में हूँ
मैं पत्तों में हूँ
और शाख़ों में हूँ
शायद इंसानो से
जुदा हूँ
मैं हवा हूँ
शायद मैं लापता हूँ।
मैं नफ़रत हूँ
और मुह्हबत भी हूँ
आंसू भी मैं
और मुस्कुराहट भी
मैं
शायद जिंदगी के कुछ
पन्नो पर गुमशुदा हूँ
मैं हवा हूँ
शायद मैं लापता हूँ।
-अनिता गोस्वामी
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एक घंटा पहले

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