विज्ञापन

सूखा

Dinesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गरमी आयी
        
                                                    
                            
मुसीबत है लायी
जल जीवन।

नदियां सूखी
तालाब मुरझाए
धरती प्यासी।

बिन बारिश
फसलें गई सूख
खेती अबूझ।

नदियां बंधीं
नहरें गई सूख
किस्मत रूठी।

जंगल कटे
जनसंख्या है भारी
यही बिमारी।

पेड़ लगाएं
पर्यावरण शुद्ध
अच्छी बारिश।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

183 कविताएं

View Profile