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सूखा

                
                                                         
                            गरमी आयी
                                                                 
                            
मुसीबत है लायी
जल जीवन।

नदियां सूखी
तालाब मुरझाए
धरती प्यासी।

बिन बारिश
फसलें गई सूख
खेती अबूझ।

नदियां बंधीं
नहरें गई सूख
किस्मत रूठी।

जंगल कटे
जनसंख्या है भारी
यही बिमारी।

पेड़ लगाएं
पर्यावरण शुद्ध
अच्छी बारिश।

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8 वर्ष पहले

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